Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

Tuesday, 31 May 2016

लघु कथा : प्रेम और फाटक

लघु कथा की श्रृंखला में तीसरा हिस्सा – प्रेम और फाटक, दो भिन्न धर्म के युवाओं की प्रेम कहानी है।दोनों अपनी मान्यताओं में दृड़ एवं पक्के दिखाई पड़ते हैं, पर प्रेम कैसे एक दूजे के लिए उन मान्यताओं को भूल जाने और एहम को तोड़ने पर मजबूर करता है| सामाजिक दकियानूसी सोच की सीमाओं के बंधन से परे प्रेम की अनंतता को दर्शाती यह लघु कथा|
पालम विहार रेलवे फाटक पर रोज़ उनकी नज़रें मिलतीं। इस सिलसिले को अब २ हफ्ते होने को आ गए।
“सुन! वो लड़की क्या इधर ही देख रही है?” “हाँ भाई” बाइक पर बैठे दोस्त के इस वाक्य ने आग में जैसे घी का काम किया। देर न लगी और उसे लड़की के बस स्टॉप और कॉलेज का भी अंदाज़ा लग गया। 
नैन-मट्टका कब प्रेम में तब्दील हो गया, मालूम न पड़ा।
“तुम्हारा जामिया(Jamia Milia Islamia University) हमारे मिरांडा(Miranda House College for woman) से क्या मुकाबला करेगा।” 
“देखो! यूँ चिढ़ाया मत करो”
मासूम-से नोकझोंक के विषय कब गम्भीर मोड़ ले लें, क्या मालूम? “देखो लड़का हुआ तो नाम ज़ाकिर(zakir) होगा”
“नाम तो अभिजीत ही होगा, वरना मुझसे मिलने या बात करना भी भूल जाओ” यही सुनते साँस अधर में लटक आई। “यह धर्म भी हमारे बीच पालम विहार के फाटक की तरह है, हरदम हमें दूर करता है, “अच्छा! अब्राम(AbRam) के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?” 
उसके सवाल की शरारत से चेहरा ख़िल उठा “धत्त! बड़े आए तुम शाहरुख़ खान!”

No comments:

Post a Comment